IPC Section 87 in Hindi | भारतीय दंड संहिता की धारा 87: “जो सम्मति देता है, उसे क्षति नहीं पहुंचती”
IPC Section 87 in Hindi
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सम्मति से किया गया कार्य, अगर कर्ता का आशय मृत्यु या घोर उपहति कारित करने (गंभीर चोट पहुंचाने) का नहीं है, तो अपराध नहीं होता
IPC की धारा 87 ज्यादातर खेलकूद के मामलों, जैसे- हॉकी, गुल्ली-डंडा, क्रिकेट, फुटबॉल, मुक्केबाजी में लागू होती है. यह धारा ऐसे खेलों में अभियुक्त को आपराधिक दायित्व से सुरक्षा देती है.
जैसे- कोई व्यक्ति खेल खेलने के लिए अपनी सहमति दे देता है और खेल विधिपूर्ण तरीके से और उचित सावधानी के साथ खेला जा रहा है...और इस दौरान भी कोई घटना घट जाती है, तो वह घटना अपराध की कैटेगरी में नहीं आएगी. इसका कारण ये है कि खेलों का मुख्य उद्देश्य किसी को शारीरिक क्षति पहुंचाना नहीं होता. इस धारा का मुख्य सिद्धांत ये है कि,
- सहमति कभी भी मृत्यु या गंभीर चोट को न्यायोचित नहीं ठहराती.
- हर एक व्यक्ति अपने कार्यों के लिए सर्वोत्तम निर्णय ले सकता है.
- कोई कभी किसी ऐसे कार्यों के लिए सहमति नहीं देता, जो उसे क्षति पहुंचा सकते हैं.
"वह कोई बात, जो मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के आशय से न की गई हो और जिसके बारे में कर्ता को यह ज्ञात न हो कि उससे मृत्यु या घोर उपहति कारित होना सम्भाव्य है, किसी ऐसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस बात से 18 साल से ज्यादा के उम्र के व्यक्ति को, जिसने वह अपहानि सहन करने की चाहे अभिव्यक्त या चाहे विवक्षित सम्मति दे दी हो, कारित हो या कारित होना कर्ता द्वारा आशयित हो या जिसके बारे में कर्ता को ज्ञात हो कि वह उपर्युक्त जैसे किसी व्यक्ति को, जिसने उस अपहानि की जोखिम उठाने की सम्मति दे दी है, उस बात द्वारा कारित होनी संभाव्य है."
धारा 87 इंग्लिश विधि के सूत्र "जो सम्मति देता है, उसे क्षति नहीं पहुंचती" पर आधारित है. इस धारा के तहत गंभीर चोट या मृत्यु के अलावा अन्य कोई क्षति भले ही आशयित रही हो, या कर्ता को उसके होने की संभावना का ज्ञान रहा हो, तो ऐसी परिस्थितियों में अपराध नहीं माना जाएगा, अगर-
(1) वह कार्य ना तो मृत्यु या गंभीर चोट कारित करने के आशय से किया गया हो, और न इस ज्ञान से किया गया हो कि उस कार्य से मृत्यु या गंभीर चोट कारित होने की संभावना है.
(2) क्षति किसी व्यक्ति को उसकी सम्मति से कारित की गई हो,
(3) सम्मति देने वाला व्यक्ति 18 साल से ज्यादा की उम्र का है,
(4) सम्मति स्पष्ट या विवक्षित हो सकती है.
उदाहरण-
क्रिकेट के दौरान बल्लेबाज द्वारा चौका या छक्का लगाने के लिए बल्ला घुमाया जाता है. गेंद उड़कर किसी खिलाड़ी के सिर पर लग जाती है, जिससे उस खिलाड़ी की मौके पर ही मौत हो जाती है, तो वह बल्लेबाज किसी अपराध का दोषी नहीं है, अगर खेल पूरी सावधानी और नियमों के साथ खेला जा रहा था, क्योंकि फिर इसमें कोई दो राय नहीं है कि बल्लेबाज का आशय किसी खिलाड़ी को मारने का नहीं था.
अगर सम्मति किसी बेहद खतरनाक काम को करने के लिए प्राप्त कर ली जाती है और फिर उस काम को करने के दौरान सहमति देने वाले की मौत हो जाती है, तो अगर सहमति लेने वाले का आशय किसी की मृत्यु कारित करना नहीं था, या सहमति लेने वाला यह नहीं जानता था कि इससे मौत हो सकती है, तो ऐसे में सीमित दंड की व्यवस्था की जाती है.
जैसे- कोई खिलाड़ी किसी व्यक्ति के सिर पर नींबू रखकर उस पर बंदूक से निशाना लगाता है और उसका निशाना चूक जाता है, जिससे उस व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो ऐसे में अभियुक्त हत्या की कोटि में ना आने वाले आपराधिक मानववध का दोषी होगा.
वहीं, कुछ कार्य या खेल, जिन पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया है, उन्हें सहमति लेकर करने या खेलने पर अगर किसी पक्षकार को कोई क्षति पहुंचती है, तो ऐसे में अभियुक्त को धारा 87 का बचाव नहीं मिलेगा.
महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट (BNS 2023)
1 जुलाई 2024 से भारत में नया कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू हो चुका है, जिसने 1860 की भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान ले लिया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत पुराने कानून (IPC) की धारा 87 के सभी प्रावधानों को अब BNS की धारा 25 (Section 25 of BNS) के अंतर्गत शामिल किया गया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं, पुराने मामलों और अकादमिक अध्ययन के लिए IPC धारा 87 की जानकारी आज भी अनिवार्य है।
नए कानून (BNS) में IPC की धारा 87 के प्रावधान अब BNS की धारा 25 (Section 25 of BNS) के अंतर्गत दिए गए हैं।
Section 25 of BNS
इस धारा का मूल कानूनी सिद्धांत और इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
खेल और खेलकूद का नियम (Volenti non fit injuria)
यह धारा मुख्य रूप से आपसी सहमति से किए जाने वाले उन कार्यों को कानूनी संरक्षण देती है जिसमें जानबूझकर गंभीर चोट पहुँचाने या मारने का इरादा नहीं होता। इसे "सहमति से होने वाली क्षति अपराध नहीं है" के कानूनी सिद्धांत पर समझा जाता है।
इस धारा के मुख्य बिंदु:
- उम्र की सीमा: सहमति देने वाले व्यक्ति की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
- सहमति का प्रकार: यह सहमति स्पष्ट (Express) या व्यवहार द्वारा छिपी हुई (Implied) हो सकती है।
- इरादा (Intent): कार्य करने वाले व्यक्ति का इरादा किसी की मृत्यु या गंभीर चोट (Grievous hurt) पहुँचाने का नहीं होना चाहिए, और न ही उसे यह पता होना चाहिए कि उसके कृत्य से ऐसा परिणाम हो सकता है।
प्रसिद्ध उदाहरण (Illustration):
यदि 'A' और 'Z' मनोरंजन के लिए आपस में तलवारबाजी या कुश्ती खेलने पर सहमत होते हैं। यह समझौता दर्शाता है कि दोनों बिना किसी बेईमानी के खेल के दौरान लगने वाली किसी भी चोट का जोखिम उठाने के लिए सहमत हैं। यदि खेल के नियमों के तहत खेलते हुए 'A' से 'Z' को कोई चोट लग जाती है, तो BNS की धारा 25 के तहत 'A' ने कोई अपराध नहीं किया है।

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