बृहस्पति पर दिखी पृथ्वी की Northern Lights से सैकड़ों गुना शक्तिशाली रोशनी, James Webb ने देखे नए रहस्य
James Webb Space Telescope ने बृहस्पति के ध्रुवीय क्षेत्र में बनने वाले Aurora की ऐसी तेज और तेजी से बदलती चमक को रिकॉर्ड किया है, जो वैज्ञानिकों को इस विशाल ग्रह के वातावरण और चुंबकीय क्षेत्र को समझने में नई जानकारी दे रही है।
पृथ्वी पर दिखाई देने वाली Northern Lights (Aurora) दुनिया की सबसे खूबसूरत प्राकृतिक घटनाओं में से एक हैं। लेकिन हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) पर बनने वाला Aurora इससे कहीं अधिक विशाल और ऊर्जावान है।
NASA के James Webb Space Telescope (JWST) ने बृहस्पति के Aurora का अध्ययन करते हुए पाया कि इसकी चमक में कभी-कभी सिर्फ कुछ सेकंड में बदलाव हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इसके अलावा H₃⁺ (ट्राइहाइड्रोजन आयन) से होने वाले अवरक्त उत्सर्जन में भी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक परिवर्तनशीलता देखी है।
इन observations से बृहस्पति के ऊपरी वातावरण और उसके चुंबकीय क्षेत्र में होने वाली प्रक्रियाओं को समझने का एक नया रास्ता खुला है।
Aurora क्या होता है?
Aurora किसी ग्रह के वातावरण में दिखाई देने वाली एक प्राकृतिक चमक है।
जब अंतरिक्ष में मौजूद ऊर्जावान आवेशित कण किसी ग्रह के वातावरण में उसके चुंबकीय ध्रुवों के पास पहुंचते हैं, तो वे वहां मौजूद गैस के परमाणुओं और अणुओं से टकराते हैं। इन टक्करों के कारण गैस चमकने लगती है और Aurora दिखाई देता है।
पृथ्वी पर उत्तरी ध्रुव के आसपास दिखाई देने वाले Aurora को Northern Lights और दक्षिणी ध्रुव के आसपास दिखाई देने वाले Aurora को Southern Lights कहा जाता है।
पृथ्वी पर Northern Lights कैसे बनती हैं?
पृथ्वी का Aurora मुख्य रूप से सूर्य से आने वाले आवेशित कणों से जुड़ा है।
सूर्य से लगातार आवेशित कणों की एक धारा निकलती रहती है, जिसे Solar Wind कहा जाता है। जब सूर्य पर शक्तिशाली गतिविधियां होती हैं, तो बहुत अधिक ऊर्जावान कण पृथ्वी की ओर आ सकते हैं।
पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इन कणों को ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर निर्देशित करने में मदद करता है। जब ये कण ऊपरी वायुमंडल में मौजूद गैसों से टकराते हैं, तो वे गैसों को ऊर्जा देते हैं और उनसे अलग-अलग रंगों की रोशनी निकलती है।
इसी प्रक्रिया से हमें आसमान में हरे, लाल, बैंगनी और अन्य रंगों की Northern Lights दिखाई देती हैं।
बृहस्पति का Aurora इतना खास क्यों है?
बृहस्पति पर भी Aurora बनने में सूर्य से आने वाले आवेशित कणों की भूमिका होती है, लेकिन इसकी पूरी प्रक्रिया पृथ्वी जैसी नहीं है।
बृहस्पति का चुंबकीय क्षेत्र बहुत शक्तिशाली है और उसका प्रभाव बहुत बड़े क्षेत्र तक फैला हुआ है। इसके अलावा बृहस्पति का चंद्रमा Io भी इसके Aurora से जुड़ी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Io बेहद सक्रिय ज्वालामुखीय चंद्रमा है। इसके ज्वालामुखियों से निकलने वाला पदार्थ बृहस्पति के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण को प्रभावित करता है और वहां मौजूद आवेशित कणों की प्रक्रिया में योगदान देता है।
इसी वजह से बृहस्पति का Aurora पृथ्वी के Aurora की तुलना में बहुत अधिक ऊर्जावान और जटिल है।
NASA के अनुसार, बृहस्पति के Aurora पृथ्वी के Aurora की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक ऊर्जावान हो सकते हैं।
James Webb ने बृहस्पति के Aurora को कब देखा?
James Webb Space Telescope ने बृहस्पति के उत्तरी ध्रुव के पास Aurora का यह विशेष observation 25 दिसंबर 2023 को किया था।
इसके लिए Webb के NIRCam (Near-Infrared Camera) उपकरण का इस्तेमाल किया गया। Observations 3.36 माइक्रोन (F335M) की तरंगदैर्ध्य पर किए गए थे।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। Webb ने इस अध्ययन में अवरक्त (Infrared) प्रकाश में Aurora को देखा। यही वजह है कि यह खास तौर पर H₃⁺ से निकलने वाले infrared emission का अध्ययन करने के लिए उपयोगी है।
Aurora की चमक कुछ सेकंड में बदलती दिखी
वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि बृहस्पति के Aurora की चमक धीरे-धीरे बदलेगी। लेकिन Webb के observations ने इससे कहीं अधिक तेज बदलाव दिखाए।
अध्ययन का नेतृत्व University of Leicester के वैज्ञानिक Jonathan Nichols की टीम ने किया। टीम ने Aurora को बहुत तेजी से बदलते हुए देखा और पाया कि इसकी चमक में कभी-कभी कुछ सेकंड के अंतराल में बदलाव हो रहा था।
यह observation महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि बृहस्पति के ऊपरी वातावरण में ऊर्जा और आवेशित कणों से जुड़ी प्रक्रियाएं बहुत तेज गति से बदल सकती हैं।
H₃⁺ क्या है और वैज्ञानिक इसका अध्ययन क्यों कर रहे हैं?
इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा H₃⁺ यानी ट्राइहाइड्रोजन आयन है।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं: जब ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन बृहस्पति के वातावरण में मौजूद आणविक हाइड्रोजन से टकराते हैं, तो H₃⁺ बन सकता है।
H₃⁺ अवरक्त प्रकाश में चमकता है। इसलिए James Webb जैसे infrared telescope की मदद से वैज्ञानिक इसके emission को अच्छी तरह देख सकते हैं।
Webb के observations में H₃⁺ emission में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक तेजी से बदलाव दिखाई दिए। वैज्ञानिकों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बृहस्पति के ऊपरी वातावरण के गर्म होने और ठंडा होने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।
Webb और Hubble ने क्या अलग देखा?
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने James Webb के साथ Hubble Space Telescope से भी बृहस्पति के Aurora का observation किया।
यहां दोनों telescopes की भूमिका को समझना जरूरी है।
James Webb ने infrared प्रकाश में H₃⁺ emission को देखा, जबकि Hubble ने इसी समय ultraviolet (UV) observations किए। यानी दोनों telescopes प्रकाश की अलग-अलग wavelengths में बृहस्पति के Aurora को देख रहे थे।
इसलिए दोनों तस्वीरों का बिल्कुल एक जैसा दिखाई देना जरूरी नहीं है। अलग wavelengths बृहस्पति के वातावरण में अलग प्रक्रियाओं और ऊंचाइयों के बारे में जानकारी दे सकती हैं।
लेकिन वैज्ञानिकों को एक खास observation ने सोचने पर मजबूर किया।
Webb में दिखाई देने वाली सबसे चमकीली infrared emission का Hubble के ultraviolet observations में कोई स्पष्ट counterpart नहीं मिला। Research team के अनुसार, इस संयुक्त observation को समझाने के लिए ऐसी particle precipitation की स्थिति की जरूरत पड़ती है जिसे पहले संभव नहीं माना जाता था। इस emission का कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
इसलिए इसे केवल "दोनों telescopes ने अलग wavelength देखी" कहकर समाप्त नहीं किया जा सकता। असली वैज्ञानिक सवाल यह है कि infrared में दिखाई देने वाली यह विशेष चमक किस भौतिक प्रक्रिया से पैदा हो रही है और इसका ultraviolet counterpart इतना कमजोर या अनुपस्थित क्यों है।
इस खोज का महत्व क्या है?
बृहस्पति का Aurora सिर्फ एक खूबसूरत रोशनी नहीं है। यह वैज्ञानिकों को ग्रह के magnetosphere, ionosphere और upper atmosphere के बारे में जानकारी देता है।
Aurora का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि:
- बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र में आवेशित कण कैसे घूमते हैं।
- ऊर्जा ग्रह के ऊपरी वातावरण तक कैसे पहुंचती है।
- वातावरण में गैसें किस तरह ऊर्जा प्राप्त करती हैं।
- ऊपरी वातावरण गर्म और ठंडा कैसे होता है।
- बृहस्पति और उसके चंद्रमा Io के बीच होने वाली प्रक्रियाएं Aurora को कैसे प्रभावित करती हैं।
इसलिए Aurora का अध्ययन बृहस्पति के पूरे space environment को समझने में मदद करता है।
बृहस्पति और पृथ्वी के Aurora में अंतर
| विशेषता | पृथ्वी का Aurora | बृहस्पति का Aurora |
|---|---|---|
| सामान्य नाम | Northern Lights और Southern Lights | Polar Auroras |
| मुख्य क्षेत्र | पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्र | बृहस्पति के ध्रुवीय क्षेत्र |
| प्रमुख ऊर्जा स्रोत | सौर गतिविधि और आवेशित कण | सौर कणों के साथ बृहस्पति के magnetosphere की प्रक्रियाएं |
| चुंबकीय क्षेत्र | अपेक्षाकृत कमजोर | बहुत शक्तिशाली |
| विशेष प्रभाव | सुंदर रंगीन रोशनी | बहुत विशाल और अत्यधिक ऊर्जावान Aurora |
| अध्ययन में महत्वपूर्ण emission | अलग-अलग गैसों से emission | H₃⁺ infrared emission महत्वपूर्ण |
| खास observation | Solar storms के दौरान तेज हो सकता है | चमक में कुछ सेकंड में बदलाव देखा गया |
बृहस्पति का आकार कितना बड़ा है?
बृहस्पति को अक्सर "पृथ्वी से 1,300 गुना बड़ा" कहा जाता है, लेकिन यह वाक्य वैज्ञानिक रूप से अधूरा है।
सही बात यह है कि बृहस्पति का आयतन पृथ्वी से लगभग 1,300 गुना है। यानी आयतन की तुलना करें तो बृहस्पति के अंदर लगभग 1,300 पृथ्वी समा सकती हैं।
वहीं बृहस्पति का द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 318 गुना है।
इसलिए "1,300 गुना बड़ा ग्रह" की जगह "आयतन में पृथ्वी से लगभग 1,300 गुना बड़ा" कहना अधिक सही है।
आगे वैज्ञानिक क्या अध्ययन करेंगे?
वैज्ञानिक अब Webb और Hubble से मिले observations के बीच दिखाई देने वाले अंतर को और समझना चाहते हैं।
NASA के अनुसार, टीम भविष्य में और Webb observations करने की योजना बना रही है। इन observations की तुलना NASA के Juno spacecraft से प्राप्त data के साथ भी की जाएगी। इससे वैज्ञानिक बृहस्पति के Aurora और उसके आसपास के magnetic environment को और बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
Nature Communications में प्रकाशित research में भी Webb observations से Aurora में seconds तक की timescale पर variability और तेजी से फैलने वाले auroral features का उल्लेख किया गया है।
James Webb की इस खोज से क्या पता चला?
इस observation से बृहस्पति के Aurora को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
पहली, बृहस्पति के Aurora पृथ्वी के Aurora की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक ऊर्जावान हैं।
दूसरी, H₃⁺ का infrared emission पहले की अपेक्षा कहीं अधिक तेजी से बदल सकता है।
तीसरी, Aurora की कुछ गतिविधियां कुछ सेकंड के भीतर बदलती दिखाई दीं।
चौथी, Webb के infrared और Hubble के ultraviolet observations को साथ देखने पर एक ऐसी emission सामने आई, जिसका कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
यानी James Webb ने बृहस्पति के Aurora को केवल अधिक स्पष्टता से देखने में मदद नहीं की, बल्कि इस विशाल ग्रह के वातावरण और magnetosphere से जुड़े कुछ नए वैज्ञानिक सवाल भी सामने रखे हैं।
निष्कर्ष
पृथ्वी की Northern Lights हमें रात के आसमान में खूबसूरत रंगीन रोशनी दिखाती हैं, लेकिन बृहस्पति का Aurora कहीं अधिक विशाल और ऊर्जावान प्राकृतिक घटना है।
James Webb Space Telescope ने 25 दिसंबर 2023 को बृहस्पति के उत्तरी ध्रुव के Aurora का infrared observation किया और पाया कि H₃⁺ emission में कुछ सेकंड के स्तर तक तेज बदलाव हो सकते हैं।
Webb और Hubble के अलग-अलग wavelengths में किए गए observations ने बृहस्पति के Aurora को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण नई जानकारी दी है। साथ ही, एक विशेष infrared emission का कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
अब वैज्ञानिक Webb और Juno के भविष्य के observations की मदद से यह समझने की कोशिश करेंगे कि बृहस्पति के ध्रुवों पर इतनी तेज और शक्तिशाली Aurora activity के पीछे वास्तव में कौन-सी भौतिक प्रक्रियाएं काम कर रही हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| ग्रह | बृहस्पति (Jupiter) |
| घटना | Aurora |
| मुख्य टेलीस्कोप | James Webb Space Telescope |
| उपकरण | NIRCam |
| Observation date | 25 दिसंबर 2023 |
| Observation wavelength | 3.36 माइक्रोन |
| महत्वपूर्ण आयन | H₃⁺ (ट्राइहाइड्रोजन आयन) |
| अन्य टेलीस्कोप | Hubble Space Telescope |
| Hubble observations | Ultraviolet |
| Webb observations | Infrared |
| विशेष खोज, सबसे बड़ा रहस्य |
Aurora की brightness में कुछ सेकंड में बदलाव, Webb में दिखाई देने वाली सबसे चमकीली Aurora का Hubble के पराबैंगनी अवलोकनों में स्पष्ट समान संकेत नहीं मिला |
| पृथ्वी से तुलना | बृहस्पति के Aurora सैकड़ों गुना अधिक ऊर्जावान |
| आगे का अध्ययन | Webb और NASA Juno data की तुलना |
| Research journal | Nature Communications |
| NASA article date | 12 मई 2025 |
स्रोत:
NASA, NASA’s Webb Reveals New Details, Mysteries in Jupiter’s Aurora — 12 मई 2025। NASA के अनुसार observations 25 दिसंबर 2023 को किए गए थे।
Research: Jonathan Nichols et al., Dynamic infrared aurora on Jupiter, Nature Communications, 2025.


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