NISAR सैटेलाइट का डेटा अब सार्वजनिक: NASA-ISRO मिशन से पृथ्वी की बदलती सतह पर मिलेगी नई जानकारी
NASA और ISRO ने 20 जुलाई 2026 से NISAR मिशन (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) का प्रारंभिक वैज्ञानिक डेटा आम लोगों और शोधकर्ताओं के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। यह पृथ्वी का अध्ययन करने वाला दुनिया का सबसे उन्नत रडार उपग्रहों में से एक है, जिसे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिलकर विकसित किया है।
इस डेटा के सार्वजनिक होने से वैज्ञानिक पृथ्वी की सतह में होने वाले छोटे-से-छोटे बदलावों का अध्ययन पहले से कहीं अधिक सटीकता से कर सकेंगे।
NISAR क्या है?
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) एक पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रह है, जो रडार तकनीक की सहायता से पृथ्वी की सतह का अध्ययन करता है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दो अलग-अलग प्रकार के रडार लगे हैं—
- L-band Radar (NASA द्वारा विकसित) – यह पेड़ों, बर्फ और मिट्टी की ऊपरी परत के भीतर तक संकेत भेज सकता है।
- S-band Radar (ISRO द्वारा विकसित) – यह वनस्पति, कृषि भूमि और सतह से जुड़ी जानकारी को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड करता है।
यह दुनिया का पहला उपग्रह है जिसमें दोनों प्रकार के रडार एक साथ लगाए गए हैं।
NISAR का डेटा क्यों महत्वपूर्ण है?
अब उपलब्ध कराए गए डेटा की मदद से वैज्ञानिक निम्नलिखित कार्य कर सकेंगे—
- पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को मापना।
- ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों की गति का अध्ययन।
- जंगलों और आर्द्रभूमि (Wetlands) में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी।
- कृषि क्षेत्रों की स्थिति का विश्लेषण।
- भूस्खलन (Landslides) और ज्वालामुखीय गतिविधियों की निगरानी।
- भूकंप के बाद जमीन में आए बदलावों का पता लगाना।
- जमीन धँसने (Land Subsidence) की पहचान करना।
- प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों में सहायता करना।
एक वर्ष में क्या-क्या किया?
NISAR का प्रक्षेपण 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था। पिछले एक वर्ष में मिशन टीम ने,
- रडार उपकरणों का परीक्षण किया।
- डेटा को अधिक सटीक बनाने के लिए कैलिब्रेशन किया।
- एल्गोरिद्म में सुधार किया।
- हर 12 दिन में लगभग पूरी पृथ्वी की भूमि और बर्फीले क्षेत्रों का अवलोकन किया।
अंटार्कटिका की 'हमिंगबर्ड' जैसी तस्वीर क्यों चर्चा में है?
हाल ही में NISAR द्वारा जारी एक तस्वीर सोशल मीडिया और वैज्ञानिक जगत में चर्चा का विषय बन गई क्योंकि वह हमिंगबर्ड (Hummingbird) जैसी दिखाई देती है।
लेकिन वास्तव में वह तस्वीर पूर्वी अंटार्कटिका (East Antarctica) में स्थित Nunatak Zaterjavshijsja नामक एक पर्वत शिखर की है।
जब ग्लेशियर इस पर्वत के चारों ओर बहता है, तो बर्फ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और उसमें गहरी दरारें (Crevasses) बन जाती हैं। NISAR का रडार इन दरारों को इतनी स्पष्टता से दिखाता है कि वे साधारण कैमरे से ली गई तस्वीरों में दिखाई ही नहीं देतीं।
तस्वीर में हरा और मैजेंटा रंग क्यों दिखाई देता है?
यह सामान्य फोटो नहीं बल्कि रडार डेटा से तैयार की गई वैज्ञानिक छवि है।
🟣 मैजेंटा (Magenta)
यह अपेक्षाकृत चिकनी बर्फ से लौटने वाले रडार संकेतों को दर्शाता है।
मैजेंटा रंग उन क्षेत्रों को दर्शाता है जहाँ सतह से रडार का सतही (Surface Scattering) परावर्तन अधिक होता है।
🟢 हरा (Green)
बर्फ के भीतर मौजूद परतों, दरारों तथा अन्य आंतरिक संरचनाओं से लौटने वाले संकेत।
यह उन स्थानों को दिखाता है जहाँ रडार तरंगें बर्फ के भीतर प्रवेश कर दरारों और असमान संरचनाओं से टकराकर वापस आती हैं। इसे Volume Scattering कहा जाता है।
⚪ सफेद (White)
जहाँ दोनों प्रकार के संकेत एक साथ मजबूत होते हैं, वहाँ सफेद रंग दिखाई देता है। अर्थात् जहाँ Surface और Volume Scattering दोनों का योगदान अधिक होता है।
NISAR सामान्य सैटेलाइट से अलग कैसे है?
अधिकांश उपग्रह केवल सूर्य के प्रकाश में तस्वीरें लेते हैं। लेकिन NISAR का रडार,
- बादलों के आर-पार देख सकता है।
- रात में भी काम करता है।
- बारिश या खराब मौसम में भी डेटा एकत्र करता है।
- पेड़ों के नीचे की सतह तक जानकारी प्राप्त कर सकता है। L-band रडार घने वनों के भीतर तक प्रवेश करके उनकी संरचना तथा भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में सक्षम है।
- बर्फ की ऊपरी परत के अंदर की संरचना का भी अध्ययन कर सकता है।
यही कारण है कि यह जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है।
NISAR का डेटा कहाँ उपलब्ध है?
NASA तथा ISRO अपने-अपने डेटा पोर्टलों के माध्यम से वैज्ञानिक डेटा चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध करा रहे हैं।- NASA ने अपने L-band डेटा को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।
- ISRO ने S-band डेटा को अपने Bhoonidhi Portal पर जारी करना शुरू कर दिया है।
आने वाले महीनों में मिशन से प्राप्त और अधिक डेटा भी सार्वजनिक किया जाएगा।
NISAR की प्रमुख विशेषताएँ
- दुनिया का पहला Dual-Frequency SAR Satellite
- NASA और ISRO का संयुक्त मिशन
- 12 मीटर (39 फीट) व्यास का विशाल रडार एंटीना
- लगभग हर 12 दिन में पृथ्वी की अधिकांश भूमि तथा बर्फ से ढके क्षेत्रों का पुनः अवलोकन
- प्रतिदिन कई टेराबाइट वैज्ञानिक डेटा का संग्रह
NISAR मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?
NISAR केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि पृथ्वी की बदलती परिस्थितियों को समझने का एक शक्तिशाली वैज्ञानिक उपकरण है।
इसके माध्यम से वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, जंगलों की स्थिति, कृषि, भू-धंसाव, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का पहले से अधिक सटीक अध्ययन कर सकेंगे। यह मिशन भविष्य में आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: NISAR क्या है?
उत्तर: NISAR, NASA और ISRO द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो डुअल-फ्रीक्वेंसी रडार की सहायता से पृथ्वी की सतह का अध्ययन करता है।
प्रश्न: NISAR कब लॉन्च हुआ था?
उत्तर: इसका प्रक्षेपण 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था।
प्रश्न: NISAR की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर: यह दुनिया का पहला उपग्रह है जिसमें L-band और S-band दोनों Synthetic Aperture Radar (SAR) एक साथ लगाए गए हैं।
प्रश्न: NISAR किन क्षेत्रों में उपयोगी है?
उत्तर: यह भूकंप, भूस्खलन, ग्लेशियर, जंगल, कृषि, भूमि धंसाव, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में अत्यंत उपयोगी है।
प्रश्न: क्या NISAR का डेटा सभी के लिए उपलब्ध है?
उत्तर: हाँ। NASA और ISRO ने इसके वैज्ञानिक डेटा को चरणबद्ध तरीके से सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है, ताकि दुनिया भर के शोधकर्ता और वैज्ञानिक इसका उपयोग कर सकें।
Source / Reference:
The information in this article is based on official material released by NASA's Jet Propulsion Laboratory (JPL) and the NASA–ISRO NISAR mission.
Tags: दुनिया का पहला Dual Frequency SAR Satellite, NASA और ISRO का संयुक्त मिशन, L-band NASA द्वारा विकसित



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