भगवद्गीता अध्याय 14 Interactive Worksheet
सत्त्व, रजस और तमस को समझें और उन्हें अपनी आज की digital life, social media, study और communication से जोड़कर देखें।
- पहले Chapter 14 के मूल श्लोक और सरल भावार्थ पढ़ें।
- MCQ, True/False, Fill in the Blanks और Matching हल करें।
- Think & Reflect में अपने वास्तविक जीवन और digital behaviour पर विचार करें।
- हर प्रश्न के लिए उत्तर देखें button उपलब्ध है।
- अंत में Final Submit & Get Score दबाएँ।
📝 Part A — MCQ
5 प्रश्न × 1 अंक = 5 अंक
1. अध्याय 14 में प्रकृति से उत्पन्न कितने गुण बताए गए हैं?
श्लोक 14.5 में सत्त्व, रजस और तमस तीन गुण बताए गए हैं।
2. श्लोक 14.6 के अनुसार सत्त्वगुण किससे बाँधता है?
श्लोक 14.6 में सत्त्व को सुखसंग और ज्ञानसंग से बाँधने वाला बताया गया है।
3. रजोगुण की प्रमुख विशेषताओं में क्या शामिल है?
14.7 में रजस को तृष्णा और आसक्ति से उत्पन्न तथा कर्मसंग से बाँधने वाला कहा गया है।
4. तमोगुण से कौन-सी प्रवृत्तियाँ जुड़ी हैं?
श्लोक 14.8 में तमस को प्रमाद, आलस्य और निद्रा से जोड़ा गया है।
5. श्लोक 14.26 के अनुसार तीनों गुणों को पार करने का प्रमुख साधन क्या बताया गया है?
14.26 में "अव्यभिचारेण भक्तियोगेन" भगवान की सेवा करने वाले को गुणों से परे जाने योग्य बताया गया है।
✅ Part B — True / False
4 प्रश्न × 1 अंक = 4 अंक — instant feedback
6. सत्त्वगुण प्रकाश और ज्ञान से संबंधित बताया गया है।
7. रजोगुण का संबंध मुख्यतः आलस्य और निद्रा से है।
8. तीनों गुण प्रकृति से उत्पन्न बताए गए हैं।
9. गुणातीत व्यक्ति निन्दा और स्तुति में समान नहीं रहता।
✍️ Part C — Fill in the Blanks
4 प्रश्न × 1 अंक = 4 अंक
10. प्रकृति के तीन गुण हैं — ________, रजस और तमस।
11. श्लोक 14.12 के अनुसार रजोगुण की वृद्धि होने पर ________ उत्पन्न होता है।
12. तमोगुण बढ़ने पर ________ और मोह उत्पन्न होते हैं।
13. श्लोक 14.26 में गुणों को पार करने के लिए अव्यभिचारी ________ का उल्लेख है।
🔗 Part D — Match the Following
5 सही मिलान × 1 अंक = 5 अंक
14. सही गुण/श्लोक को उसके मुख्य भाव से मिलाएँ:
सत्त्व → प्रकाश और ज्ञान
रजस → लोभ और कर्मासक्ति
तमस → प्रमाद और आलस्य
गुणातीत व्यक्ति → समदुःखसुख
श्लोक 14.26 → अव्यभिचारी भक्तियोग
💭 Part E — Think & Reflect: Today's Generation
4 प्रश्न × 2 अंक = 8 अंक
इन questions का उद्देश्य Chapter 14 के तीन गुणों को social media, digital speech, study habits, ambition और emotional reactions के संदर्भ में समझना है।
15. Social Media & Sattva 📱
आप social media use करते हैं, लेकिन आप ऐसा content चुनते हैं जो ज्ञान,
सीखने और सकारात्मक विचार बढ़ाता है। यह Chapter 14 के किस विचार से सबसे अधिक मेल खाता है?
14.6, 14.11 और 14.17 में सत्त्व को प्रकाश और ज्ञान से जोड़ा गया है। Modern context में conscious, knowledge-oriented content इसका एक practical example हो सकता है।
16. Digital Speech 🗣️
किसी व्यक्ति ने आपके विचार की आलोचना कर दी। आप तुरंत angry reply लिखना चाहते हैं।
Chapter 14.24–25 की भावना के सबसे निकट कौन-सा response है?
14.24–25 में सुख-दुःख, प्रिय-अप्रिय, निन्दा-स्तुति और मान-अपमान में समता का वर्णन है।
17. Rajas & Digital Success 🚀
एक student लगातार followers, marks और achievements बढ़ाने की चिंता में
हर समय बेचैन रहता है। Chapter 14.7 और 14.12 के संदर्भ में कौन-सा observation उचित है?
14.7 और 14.12 रजस को तृष्णा, आसक्ति, लोभ और कर्म-प्रवृत्ति से जोड़ते हैं।
18. Digital Overload 🧠
आप रात देर तक बिना उद्देश्य videos देखते रहते हैं और अगले दिन पढ़ाई में मन नहीं लगता।
Chapter 14.8 के अनुसार इसमें कौन-सी प्रवृत्तियाँ दिखाई दे सकती हैं?
14.8 में तमस को प्रमाद, आलस्य और निद्रा से जोड़ा गया है।
🎯 Part F — Situation Based Questions
3 प्रश्न × 2 अंक = 6 अंक
19. Situation: Exam Preparation 📚
दो students हैं। A पढ़ाई को समझकर शांत मन से करता है।
B लगातार task बदलता है, बहुत कुछ शुरू करता है लेकिन पूरा नहीं करता।
Chapter 14 के अनुसार A की स्थिति किस गुण से अधिक संबंधित हो सकती है?
यहाँ प्रश्न का focus clarity और knowledge-oriented approach पर है, जो Chapter 14 में सत्त्व से जुड़ता है।
20. Situation: Viral Trend 🔥
कोई व्यक्ति बिना सोचे केवल इसलिए हर trend follow करता है क्योंकि
उसे लगता है कि इससे उसे अधिक attention मिलेगा। यह किस प्रवृत्ति से सबसे अधिक मेल खाती है?
14.7 में तृष्णा और आसक्ति को रजस से जोड़ा गया है।
21. Situation: Criticism & Praise
आपकी post को किसी ने बहुत praise किया और किसी दूसरे ने criticize किया।
Chapter 14.24–25 की दिशा में सबसे balanced response क्या होगा?
14.24–25 निन्दा-स्तुति और मान-अपमान में समता की शिक्षा देते हैं।
🏆 Part G — Final Quiz
5 प्रश्न × 1 अंक = 5 अंक
22. 14.17 के अनुसार सत्त्व से क्या उत्पन्न होता है?
23. 14.18 के अनुसार सत्त्व में स्थित व्यक्ति किस दिशा में जाता है?
24. गुणातीत व्यक्ति निन्दा और स्तुति के प्रति कैसा रहता है?
25. 14.20 के अनुसार तीनों गुणों को पार करने वाला व्यक्ति किनसे मुक्त होता है?
26. 14.27 में भगवान स्वयं को किसका आधार/प्रतिष्ठा बताते हैं?
🎉 आपका Chapter 14 Score
Percentage: 0%
📚 Quick Answer Key & Revision
| Part | Questions | Marks | Main Concepts |
|---|---|---|---|
| MCQ | 1–5 | 5 | तीन गुण, सत्त्व, रजस, तमस, भक्तियोग |
| True / False | 6–9 | 4 | गुणों की विशेषताएँ और गुणातीत अवस्था |
| Fill in the Blanks | 10–13 | 4 | सत्त्व, लोभ, प्रमाद, भक्तियोग |
| Matching | 14 | 5 | तीनों गुण और गुणातीत व्यक्ति |
| Think & Reflect | 15–18 | 8 | Social Media, Digital Speech, ambition, digital overload |
| Situation Based | 19–21 | 6 | Study, trends, criticism & praise |
| Final Quiz | 22–26 | 5 | Chapter 14 revision |
Chapter 14 का central theme: सत्त्व, रजस और तमस प्रकृति के तीन गुण हैं। व्यक्ति इनके प्रभावों को पहचानकर उनसे ऊपर उठने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। अध्याय 14 के अंतिम श्लोक भक्ति, समता और गुणातीत अवस्था की ओर संकेत करते हैं।
📖 Chapter 14 — सभी 27 मूल श्लोक और सरल भावार्थ

ऊपर दिए गए प्रश्न इन्हीं श्लोकों की शिक्षाओं पर आधारित हैं।
परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् ।
यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥
सर्गेऽपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च ॥
सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥
तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥
सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ ॥
तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम् ॥
प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत ॥
रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ॥
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥
रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ ॥
तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥
तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥
तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥
रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् ॥
प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥
गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति ॥
जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ॥
कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥
प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव ।
न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति ॥
गुणा वर्तन्त इत्येव योऽवतिष्ठति नेङ्गते ॥
तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ॥
सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः स उच्यते ॥
स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
शाश्वतस्य च धर्मस्य सुखस्यैकान्तिकस्य च ॥

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