Bhagavad Gita Chapter 16 Worksheet in Hindi | दैवासुरसम्पद्विभाग योग Interactive Quiz, Questions & Answers
भगवद्गीता अध्याय 16 Interactive Worksheet
दैवासुरसम्पद्विभागयोग

भगवद्गीता — Gita Chapter 16 – Divine & Demonic Qualities
श्लोकों की समझ + Today's Generation + Social Media + Digital Speech + Think & Reflect
कुल अंक: 50पहले प्रश्न स्वयं हल करें। जहाँ उपलब्ध हो वहाँ “उत्तर देखें” से अपना उत्तर जाँचें। अंत में Final Submit & Get Score दबाएँ। आपको कुल अंक, प्रतिशत और performance feedback मिलेगा।
Part A — Multiple Choice Questions
8 प्रश्न × 1 अंक = 8 अंक
श्लोक 16.1 में अभय अर्थात् निर्भयता को दैवी सम्पदा में रखा गया है।
श्लोक में अक्रोध अर्थात् क्रोध का अभाव बताया गया है।
16.4 में दम्भ, दर्प, अतिमान, क्रोध, पारुष्य और अज्ञान को आसुरी सम्पदा बताया गया है।
श्लोक 16.5 में दैवी सम्पदा को विमोक्ष अर्थात् मुक्ति की ओर ले जाने वाली बताया गया है।
16.12 में अन्यायपूर्वक अर्थ-संचय को कामभोग के उद्देश्य से जोड़ा गया है।
यह अध्याय 16 की सबसे प्रसिद्ध शिक्षाओं में से एक है।
16.24 में कार्य और अकार्य के निर्णय में शास्त्र को प्रमाण मानने की बात कही गई है।
Part B — True / False
6 प्रश्न × 1 अंक = 6 अंक
Part C — Fill in the Blanks
6 प्रश्न × 1 अंक = 6 अंक
Part D — Match the Following
5 प्रश्न × 1 अंक = 5 अंक
21. सही मिलान करें:
| गुण / विचार | सही अर्थ / श्लोक |
|---|---|
| 1. अभय | |
| 2. अक्रोध | |
| 3. दम्भ | |
| 4. लोभ | |
| 5. शास्त्र |
📱 Part E — Situation Based Questions
Today's Generation Edition — 5 प्रश्न × 1 अंक = 5 अंक
इन प्रश्नों में आधुनिक परिस्थितियाँ Chapter 16 की शिक्षाओं से जोड़ी गई हैं।
💭 Part F — Think & Reflect
5 प्रश्न × 2 अंक = 10 अंक
🏆 Part G — Final Quiz
10 प्रश्न × 1 अंक = 10 अंक
🎯 Final Submit & Get Score
सभी objective questions हल करने और Think & Reflect में अपने विकल्प चुनने के बाद नीचे दिए button पर क्लिक करें।
आपका Gita Chapter 16 Result
याद रखें: यह worksheet learning और self-reflection के लिए है। Score से अधिक महत्वपूर्ण है कि Chapter 16 की शिक्षाएँ आपके व्यवहार में कितनी दिखाई देती हैं।
📖 अध्याय 16 के 24 मूल श्लोक — Quick Reference
नीचे मूल संस्कृत श्लोक और उनके सरल भावार्थ दिए गए हैं। Worksheet के प्रश्न इन्हीं शिक्षाओं पर आधारित हैं।
दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम् ॥
दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥
भवन्ति संपदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥
अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ संपदमासुरीम् ॥
मा शुचः संपदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ॥
दैवो विस्तरशः प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ॥
न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते ॥
अपरस्परसंभूतं किमन्यत्कामहैतुकम् ॥
प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः ॥
मोहाद्गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः ॥
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥
ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसंचयान् ॥
इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् ॥
ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी ॥
यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः ॥
प्रसक्ताः कामभोगेषु पतन्ति नरकेऽशुचौ ॥
यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् ॥
मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः ॥
क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु ॥
मामप्राप्यैव कौन्तेय ततो यान्त्यधमां गतिम् ॥
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ॥
आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ॥
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥
ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ॥
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