What will happen if we stop eating meat : यदि मनुष्य मांसाहार बंद कर दे तो क्या होगा?

What will happen if we stop eating meat : यदि मनुष्य मांसाहार बंद कर दे तो क्या होगा?

non veg in mahabharata, eating non veg right or wrong, mansahar sahi galat, meat in hinduism

यदि मांसाहार बंद हो जाए और शाकाहार बढ़े तो पृथ्वी कैसे ठंडी, स्वस्थ और अमीर बन सकती है? अमेरिका की National Academy of Sciences की एक रिसर्च कहती है कि अगर दुनिया शाकाहार की ओर बढ़े तो इसका सीधा फायदा तीन स्तरों पर होगा :

1. पृथ्वी के वातावरण को (Environment)

2. लोगों के स्वास्थ्य को (Public Health)

3. दुनिया की अर्थव्यवस्था को (Global Economy)

मांसाहार → ज्यादा प्रदूषण → पृथ्वी गर्म

मांस उद्योग दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैसों का 20% पैदा करता है। यह मात्रा दुनिया भर के कार, ट्रेन, हवाई जहाज, ट्रक, सभी प्रकार के ट्रांसपोर्ट से होने वाले प्रदूषण से भी ज्यादा है। क्यों? क्योंकि जानवरों को बड़े पैमाने पर पालना, उन्हें खिलाने के लिए फसल उगाना, उन्हें पानी देना, उनके मल से बनने वाला मीथेन (Methane), मीट को प्रोसेस और ट्रांसपोर्ट करना, इन सभी चरणों में भारी मात्रा में CO₂, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड निकलती है।

तीन घंटे कार चलाने जितना प्रदूषण केवल 1 किलो मांस उत्पादन से हो जाता है। मांस का उत्पादन सबसे ज्यादा पानी बर्बाद करता है। मीट उत्पादन के लिए पानी की खपत सब्जियों से 100 गुना ज्यादा है। 

0.5 kg बनाने में कितना पानी खर्च होता है?

आलू - 127 लीटर

गेहूं - 681 लीटर

मांस - 9000 + लीटर

यह उसी पानी के बराबर है, जितना एक इंसान कई महीनों में पीता है।

मांस उत्पादन के लिए दुनिया भर में जंगल कटते हैं

Friends of Earth नामक संस्था के अनुसार, हर साल 6 लाख हेक्टेयर जंगल केवल इसलिए काट दिए जाते हैं कि वहां मांस उत्पादन के लिए जानवर पाले जा सकें। यह क्षेत्रफल बेल्जियम देश से भी दोगुना है। यानी मीट उद्योग दुनिया के जंगलों को सबसे तेज गति से खत्म कर रहा है।

एक अनुसार के अनुसार, दुनिया में जितना अनाज मांस उत्पादन के लिए पशुओं को खिलाया जाता है, अगर वही अनाज मनुष्यों को खिला दिया जाए तो दोगुनी आबादी का पेट भर सकता है। क्योंकि

1 किलो पोर्क = जानवर को 8 किलो भोजन

1 किलो चिकन = 3.5 किलो अनाज

यानी हम पहले अनाज उगाते हैं, फिर वो अनाज जानवर को खिलाते हैं, फिर उस जानवर को काटकर खा जाते हैं। यह प्रक्रिया न केवल अमानवीय व घृणित है, बल्कि मूर्खता से भरी हुई, अकुशल और महंगी भी है।

Ground Water भी दूषित होता है

400 ग्राम मांस बनने में 40 किलो कचरा और मल-मूत्र जैसा Waste बनता है। जिसमें अमोनिया, नाइट्रेट आदि होते हैं जो भूजल (Ground Water) को जहरीला बनाते हैं।

अगर लोग शाकाहार अपनाएं तो 160 करोड़ हेक्टेयर जमीन खाली हो सकती है। यह जमीन भारत के कुल क्षेत्रफल से दोगुनी है। इस जमीन का उपयोग जंगल बढ़ाने, खेती सुधारने या शहरों की बेहतर प्लानिंग में किया जा सकता है।

ज्यादा जंगल → ज्यादा बारिश → पृथ्वी ठंडी।

Public Health में भारी सुधार

शोध कहता है कि शाकाहार कम Calorie और कम Fat वाला होता है। इससे मोटापा, हार्ट डिज़ीज़, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियाँ कम होती हैं। इससे Latin America और Western देशों में हेल्थकेयर का खर्च अरबों डॉलर कम हो सकता है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती

फल, सब्जी, अनाज का उत्पादन बढ़ेगा, तो इससे दक्षिण एशिया, खासकर भारत, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। इन देशों की जलवायु और मिट्टी पौधों के लिए उत्तम है, इसलिए वे दुनिया के लिए Green Food Hub बन सकते हैं।

तो इस प्रकार कह सकते हैं कि शाकाहार सच में पृथ्वी को बचा सकता है। सभी वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के आधार पर यह स्पष्ट है कि शाकाहार से ग्रीनहाउस गैस प्रभाव कम होता है, प्रदूषण कम होता है, पानी की बर्बादी कम होती है, वनों की कटाई कम होती है, बेहतर मौसम और बेहतर स्वास्थ्य होता है, मजबूत अर्थव्यवस्था होती है, पृथ्वी ठंडी और संतुलित होती है।

इसलिए यह गलत नहीं बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक निष्कर्ष है कि शाकाहार अपनाना ग्लोबल वार्मिंग कम करने के लिए दुनिया का सबसे आसान और सबसे प्रभावी कदम है।

Comments