Eri Silk और प्रधानमंत्री मोदी: एक ‘अहिंसा धागे’ की अनसुनी कहानी जो नॉर्थ-ईस्ट से दुनिया तक पहुँची
Eri Silk और PM Modi: ‘अहिंसा रेशम’ की अनसुनी कहानी जिसने नॉर्थ-ईस्ट को दुनिया में चमकाया
भारत के नॉर्थ-ईस्ट की वादियों में एक ऐसा रेशम जन्म लेता है, जो जितना अनोखा है, उतना ही आध्यात्मिक, Eri Silk जिसे दुनिया “Ahinsa Silk” के नाम से भी जानती है। क्योंकि इसके धागे के बनने में कोई हिंसा नहीं होती… रेशम का कीड़ा अपने कोकून को खुद छोड़कर निकल जाता है, और तब उससे धागा बनाया जाता है।
लेकिन इस कहानी में एक दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब इस रेशम की गूँज मेघालय की पहाड़ियों से निकलकर देश की सबसे ऊँची कुर्सी तक पहुँचती है… और फिर दुनिया के मंच पर चमकती है।
हाँ! हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Eri Silk के कनेक्शन की।
Eri Silk: सदियों पुरानी परंपरा जिसका जिक्र हवेंसांग और अर्थशास्त्र तक में मिलता है
नॉर्थ-ईस्ट के आदिवासी समुदाय Eri सिल्क को “Ryndia”, “Erri” या “Endi” नाम से जानते हैं। यह वही रेशम है जिसके बारे में कहा जाता है कि:
“हर धुलाई के साथ इसका रंग और कोमलता बढ़ती जाती है।”
असम और मेघालय में इस रेशम को लेकर कई लोककथाएँ हैं,
कहते हैं कि पुराने समय में खासी जनजाति की महिलाएँ चाँदनी रात में एरी चादर बुनती थीं, ताकि कपड़े में प्रकृति की ऊर्जा समा जाए।
कई जगह यह भी माना जाता है कि एरी चादर पहनने से शरीर “गरम-ठंडा” संतुलित रहता है, इसलिए बौद्ध भिक्षु इसे आध्यात्मिक वस्त्र मानते हैं।
इतिहास में भी इसका उल्लेख मिलता है:
- चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने असम सिल्क की प्रशंसा की।
- कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सिल्क उत्पादन का वर्णन मिलता है।
अहिंसा का प्रतीक: क्यों इसे Modi ने ‘Cruelty-Free Heritage’ कहा?
Why PM Modi praised Eri silk? Eri Silk के धागे बनाने में कीड़े को उबाला नहीं जाता, इसलिए यह दुनिया का पहला “क्रुएल्टी-फ्री” रेशम माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 की Mann Ki Baat में इसे विशेष रूप से उल्लेख किया:
“Eri Silk भारत की अहिंसा और पर्यावरण-मित्र परंपरा का प्रतीक है।”
उन्होंने इसकी तीन प्रमुख खूबियों का जिक्र किया
- अहिंसा (No-Kill Process)
- Eco-Friendly production
- Women-Led craft tradition
उन्होंने यह भी बताया कि यह रेशम सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रखता है, एक प्राकृतिक थर्मोरेगुलेटिंग फाइबर की तरह।
Modi और Eri Silk: PM Modi बार-बार करते हैं Eri Silk की तारीफ
1. Modi ने Mann Ki Baat में Eri का नाम लेकर तारीफ की
उन्होंने कहा,
“मेघालय का Eri Silk हमारा sustainable heritage है।”
इस एक बयान के बाद ही Eri Silk के लिए ऑनलाइन search volume कई गुना बढ़ गया।
2. GI Tag पर मोदी ने गर्व व्यक्त किया
मेघालय के Eri Silk को GI Tag मिला, और मोदी ने इसे राष्ट्रीय पहचान बताकर global बाजार में बढ़ावा दिया।
3. Vocal for Local में Eri को उदाहरण बनाया
जब वे कहते हैं,
“स्थानीय उत्पादों को अपनाइये” तो Eri Silk उनका सबसे पसंदीदा उदाहरणों में से एक है।
4. महिला SHGs को विशेष सराहना
मेघालय और असम की महिलाओं द्वारा बनाए Eri products को मोदी ने “महिला-सशक्तिकरण की मिसाल” कहा।
5. Global Ethical Fashion में Eri को Brand India बनाया
उनके भाषण के बाद कई fashion designers ने इसे sustainable fashion में शामिल किया।
बौद्ध भिक्षु और मोदी, एक आम धागा: अहिंसा
बौद्ध भिक्षु सदियों से Eri की चादर पहनते हैं। मोदी ने Eri को “अहिंसा सिल्क” कहकर उसी आध्यात्मिक परंपरा को सम्मान दिया। इसे धम्म, करुणा और अहिंसा का प्रतीक बताया।
आज Eri Silk क्यों प्रीमियम फैब्रिक है?
- Original Eri Shawl ₹8,000–₹10,000
- Designer Yak + Eri Mix Shawl ₹12,000+
- Wool Mix Stoles ₹1,000–₹1,500
- Pure Eri Jacket ₹4,000–₹7,000
और हर धुलाई के बाद यह और सॉफ्ट, यानी Anti-Aging Fabric!
नॉर्थ-ईस्ट के कारीगरों को मोदी का सीधा फायदा
- Sales में वृद्धि
- Export demand में भारी उछाल
- GI tag awareness
- महिलाओं के SHGs की आय बढ़ी
मेघालय के CM तक ने कहा,
“PM Modi ने Eri Silk को वैश्विक पहचान दिलाई।”
Eri Silk एक धागा नहीं, भारत की आत्मा है, और मोदी ने इसे मंच दिया
Eri Silk की बात करते हुए मोदी केवल एक कपड़े की बात नहीं करते, वे अहिंसा, प्रकृति, परंपरा, महिला-सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं।
इसीलिए उनका और Eri Silk का रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक है, आध्यात्मिक है, और वैश्विक पहचान दिलाने वाला है।

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